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Saturday, August 22, 2015

सुना क्या आपने -


मोदी : 60 हज़ार दूँ की ज्यादा दूँ ?
जनता : मोदी मोदी
मोदी : 70 हज़ार करोड़ दूँ की ज्यादा दूँ ?
जनता : मोदी मोदी
मोदी : 80 हज़ार करोड़ दूँ की ज्यादा दूँ ?
जनता : मोदी मोदी
90 हज़ार करोड़ दूँ की ज्यादा दूँ ?
जनता : मोदी मोदी
ये जनता है की मूर्खों की भीड़ ? इन्हें नहीं पता की ये
उन्ही के खून पैसों की कमाई है ? इन्हें नहीं पता की ये
पैसा उन्हें 1 साल पहले मिल जाता तो शायद एक चूल, एक
पूल या एक सड़क अब तक बन गई होती ? इन्ही का पैसा
इन्हें ऐसे देने की बात हो रही थी जैसे भिखारी को राजा
चिढ़ा रहा हो, एक रूपये दूँ की 2 रूपये दूँ ??
( फेसबुक पर किसी का लिखा हुआ कमेंट)
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हम सोचे -
मतलब मामला सौदे का है! वह भी देश के प्रधानमंत्री द्वारा? भई वाह!
वैसे एक बात कह दें हम भी। आप मोदी जी को सही से समझे नहीं। वे देश के प्रधानमंत्री हैं, एकदम सच्चे सेवक। बिहार भी उसी देश का हिस्सा है, इतना भूगोल तो याद है उनको। अब वो किसी पार्टी वार्टी के नेता जैसा संकीर्ण सोच नहीं रखते! बिहार की जनता उनकी पार्टी को वोट दे या नितीश को, जो पैकेज का वादा किया है वो निभा कर रहेंगे। चाहे तो शाह लिख कर दे देंगे कि इस बार वाला कोई जुमला नहीं है।
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किसी का जवाब जोरदार था -
चाहें लाख लिख कर दे दें ... ससुरे करेंगे सब काम फाईलों में भी (गर जुमला न हुआ तो) ये गुजराती बनिए हैं... बिहारियों में दाल नहीं गलनी इनकी ...
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चल बुड़बक ! कौनो हम ही बुद्धु हैं का ! जब कुछ होने जाने का हैइऐ नहीं त काहे न अपनी मर्जी से वोट दें , मतबल घर का आदमी ।
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जय हो नागनाथ , i mean नागपञ्चमी की !

( sorry for delayed post )
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