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Wednesday, August 30, 2017

एक गज़ल :


आज जी भर क्यूँ न इस तौर से रोया जाए,
अपना दामन खून-ए-कातिल से भिगोया जाए।
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शहर के सूखते दरिया नज़रअंदाज़ कीजे, ...

आग जब तक न लगे, चैन से सोया जाए।
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अपने हाथों में जो है वक़्त का एक बीज उसे,
कौन काटेगा फ़सल भूल कर बोया जाए।
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ये तो मुमकिन ही नहीं आप मसीहा हो मग़र,
मेरे काँधे पे सलीब आपका ढोया जाए।
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क्या हुआ जो हकीकत में है तामील कठिन,
कम से कम ख्वाब तो आँखो में संजोया जाए ।





Thursday, July 6, 2017

" कशमकश " लघु कथा ( शब्द निष्ठा 2017 में सम्मानित )




"तुम ! मगर तुम तो इन सबको अन्धविश्वास मानती हो ?"
"विपत्ति सारे सिद्धांत खा जाती ..."
"घबराओ नहीं, मेरे रहते कोई विपत्ति तुम्हें छू भी नहीं सकती ! हाँ, बताओ तुम्हारी डेट ऑफ़ बर्थ, अभी देख लेते हैं जन्म कुंडली । "
"परन्तु मेरी विपत्ति मेरी जन्म कुंडली से नहीं, मेरी इस कहानी से पता लगेगी !"
"हहाहाहा ! तुमसे यही आशा कर सकता था ...कवितायेँ, लेख, कहानी !"
" तो शुरू करूँ ?"
" इरशाद !"
" मेरी कहानी का नायक एक बछड़ा है।  जब से हम इस फ्लैट में आये हैं।  सामने के दो अपार्टमेंट के बीच -. फिट की एक संकरी गली सी है जो पीछे से बंद है। गली जो ऊपर बने बालकोनियों से कुछ और संकरी हो जाने के कारण अँधेरी भी है, में एक आध खुले गटर भी हैं...
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"सुनो, कितनी अजीब बात है , ये बछड़ा जाने क्यों इस गली में घुस कर खड़ा रहता है। "
" हाँ, मैंने भी देखा है। अल सुबह जाता है। शायद 'कोजी' लगता हो, या फिर सिक्योर फील करता हो "
"या फिर हो सकता हो सुबह सुबह इसे खुद पेट भर आने के लिए घर से निकाल दिया जाता हो तो यहाँ इसे 'होमली' लगता हो !"
" हो सकता है। "
" अगर ये बोल सकता तो मैं इससे पूछती जरूर !"
...
" अरे सुनो, नीचे जा रहे हो ? ये दो रोटी बची हुई है कल की, उस बछड़े को दे देना ! कल रोहन के.ऍफ़.सी.  से खा आया था, सो बच गयी !"
...
"रोज ओवर ईटिंग हो जाती है, दूध पी ही नहीं पाता हूँ। आज ये रोटी रहने दो। कल सुबह उस बछड़े को दे दूंगा। "
...
"मैं जा रहा हूँ, कोई रोटी वोटी हो तो दे दो, वो बछड़ा बड़ी आशा भरी नजरों से देखता है मुझे अब !"
...
" पता है, आज मैंने लंच बनाते हुए दो रोटी ज्यादा बनाईं  घी-गुड़ डाल कर अपने हाथों से उसे खिलाया मैंने ! बड़ी प्यारी आँखें हैं उसकी। "
...
" सुनो आज कल वो बछड़ा उस अँधेरी गली में ज्यादा नहीं टिकता  क्या बात है ? "
" वो बिलाल है , वो भगा देता है उसे !"
"ओह्ह !"
" मगर अपने ऑफिस जाने के टाइम तक वो बछड़ा जरूर बैठा रहता है यहाँ वहां !"
" लगाव हो गया है उसे हमसे !"
" अरे वो तो तुम्हारा इन्तजार करता है, कब आओगी, घी गुड़ वाली रोटी अपने हाथों से खिलाओगी ! कोई पिछले जन्म का नाता है क्या ? "
" पिछले जन्म का क्यों, इसी जन्म में नाता जोड़ रही हूँ मैं तो ! कोई ऑब्जेक्शन ?"
" ना ना, मैं काहे बीच में पड़ने लगा !...हहाहाहा ... "
...
"अरे यार !"
"क्या हुआ ?"
" देखो , इस लेख में क्या लिखा है ? काले कुत्ते को या मछलियों को खाना खिलाने से ये पालतू जानवर हमारे उपर आने वाली बला खुद पर ले लेते हैं ! "
" अच्छा ? मगर अपने पास तो कोई पालतू जानवर नहीं है ! "
" ह्म्म्म..."
...
" अच्छा सुनो, आज ऑफिस से जरा जल्दी आना। शाम को शर्मा जी के पास चलना है ! "
"ठीक है "
.....
"अच्छा तो ये है कहानी ! मगर इसमें तो कहीं कोई विपत्ति नहीं दिख रही मुझे। तुम लोगों पर अगर कोई विपत्ति आती होगी तो वो मुझे तुम लोगों के जन्म कुंडली ही देख कर जानना होगा भई ! "
" पंडित जी, बात वो नहीं है। "
" फिर ?"
" मैं कशमकश में हूँ उस बछड़े को रोटी खिलाना बंद मैं कर नहीं सकती । और खिलाते हुए डर लगने लगा है ।  
मैं अपने हिस्से की विपत्तियाँ उस निरीह जानवर पर कैसे डाल दूं ? अब आप ही कोई उपाय बताएं पंडित जी ! किसकी जन्म कुंडली देखेंगे आप ? समस्या ये है कि हमारे उपर आने वाली किसी भी विपत्ति से उस बछड़े को कैसे बचाया जाए ? "
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