आज से नौ तपा आरम्भ हुआ।
सौरभ सर की योग क्लास में जोश क्या दिखा दिया मैंने, कमर नाराज़ हो गई। परसों एक पुस्तक चर्चा में जाना हुआ था। हालांकि सूरज मद्धम हो गया था, कुछ कुछ आंधी सी चल पड़ी थी। लेकिन जाने गर्मी लगी कि क्या हुआ, रात भयंकर सिर दर्द रहा। मुझको कैसा भी सिर दर्द हो, माइग्रेन ही माना जाता है। कल ढलती दोपहर तक लौटने लगी थी अपनी रौ में। शाम को हम दोनों साथ ही जाते हैं सैर पर।
"घर में बैठना और बीमार करता है, brisk walk नहीं करेंगे। और फिर दीतवार है, सब्ज़ी फल भी तो लाने हैं !"
लौटते वक़्त प्राण दोनों हाथों में थैले उठा weight lifting करते हुए और मैं दोनों हाथ हिलाते हुए चल रही थी और बड़ी मुस्कुरा रही थी।
सजा तो भुगतना ही था। आज सुबह से ORS का घोल पी रही हूँ। प्राण जाने क्यों मुस्कुरा रहे हैं ! मैं कुछ नहीं कह रही। तमाम दिक्कतों के बावजूद मैं मज़ाक में भी बुढ़ापा का नाम नहीं लेना चाहती, जून में लेह लद्दाख जो जाना है ! ज्येष्ठ का अधिक मास क्या होता है, अब महसूस होने लगा है।
बिटिया है कॉलेज, बेटा अपने कमरे में, लैपटॉप में ऑफिस है उसका। "आराम करना" की हिदायत दे प्राण भी गए ऑफिस। फ़ोन पर दोनों stores के स्टाफ़ की उपस्थिति check करके, कैमरे में दुकान पर नज़र डाल कर, मैं एकान्त में बैठ गई हूँ ।
पड़ौस से कर्णप्रिय कोलाहल सुनाई दे रहा है। दिमाग़ की बत्ती सुनहरी जली - इसी को कहते हैं गर्मी की छुट्टियां ! लगता है बबली और उसके बच्चे आ गए हैं मामा मामी, नाना नानी के घर। गोद के ठुनकते बच्चे अब ममेरी बहनों के साथ घुलमिल गए हैं। धमाचौकड़ी मची है। बाहर पोर्च से, बीच के लॉबी से होते हुए भीतर की सीढ़ियां लांघते ऊपर नीचे दौड़ भाग रहे हैं, हाहा हीहि मची है। मैं कल्पना कर रही हूँ नाना के दिल की खुशी, नानी के चेहरे पर नाटकीय गुस्सा । भाभी ननदों की बतकही।…
#मनसतरंगी
